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Декабрь
2016

तीसरा विश्व युद्ध रोकेगा नया रूसी ‘सरमात’ मिसाइल

हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बमों से भी 2 हज़ार गुनी ज़्यादा विनाशकारी ताक़त वाले एक नए बैलिस्टिक मिसाइल का आजकल उराल पर्वतमाला के इलाके में परीक्षण किया जा रहा है। जल्दी ही ’सरमात’ नाम के इस मिसाइल को रूसी सेना में शामिल कर लिया जाएगा। यह मिसाइल अलग-अलग दिशाओं में हमला करने के लिए आने वाले 10 मिसाइलों को एक साथ अपनी तरफ़ आकर्षित कर लेता है और उन्हें रास्ते में ही नष्ट कर देता है। आरएस-28 ‘सरमात’  के नाम से जाना जाने वाला यह अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल अकेला ही अमरीका के टेक्सास राज्य जितने बड़े इलाके को नष्ट कर सकता है। एक अमरीकी विश्लेषक के अनुसार, सौ टन वज़नी इस विशाल मिसाइल के सामने अमरीका का 39 टन वाला ‘मिनटमैन’ मिसाइल किसी ’राकेट संचालित सींक” की तरह लगता है।

सन् 2011 से ही ’सरमात’ मिसाइल पर काम चल रहा है। अक्टूबर 2016 में जब रूस ने इस मिसाइल की पहली तस्वीर जारी की, तो इसको लेकर चल रहे सारे कयासों पर विराम लग गया। पश्चिमी मीडिया तो ’सरमात’ मिसाइल का नाम लेते हुए भी डर रहा है।

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पश्चिमी मीडिया में ’सरमात’ मिसाइल को लेकर आ रही प्रतिक्रियाओं से यह बात साफ जाहिर हो जाती है। पश्चिमी मीडिया ने ‘सरमात’ मिसाइल को एसएस-18 ‘शैतान’ नामक मिसाइल का बेटा कहा है। उल्लेखनीय है कि उत्तर अटलाण्टिक सन्धि संगठन  यानी नाटो रूस के लगभग पचास साल पुराने आरएस-36 मिसाइल को एसएस-18 ‘शैतान’के नाम से पुकारता है, जो आज भी दुनिया का सबसे शक्तिशाली मिसाइल माना जाता है। ’सरमात’ मिसाइल न सिर्फ़ दुश्मन की निगाहों से बच निकलने में सक्षम है, बल्कि यह 11 हज़ार किलोमीटर से भी ज़्यादा दूरी पार करके अपने लक्ष्य को निशाना बनाता है। इस तरह इसे उत्तरी ध्रुव या दक्षिणी ध्रुव पर भी दागा जा सकता है, जिसके कारण दुश्मन के मन में भारी भय बैठ जाएगा।  अपनी इन विशेषताओं के कारण ही ’सरमात’ नामक यह मिसाइल दुनिया में सामरिक सन्तुलन की दृष्टि से बेहद उपयोगी है।

रूस के उप-रक्षा मन्त्री (आयुध) यूरी बरीसफ़ के अनुसार 2018 तक यह नया मिसाइल रूसी सेना में शामिल कर लिया जाएगा और सेना को इसकी सप्लाई शुरू हो जाएगी।

’सरमात’ रूस को अजेय नहीं बनाएगा

मिसाइलों के राजा एसएस-18 का डिजाइन भले ही पचास साल पुराना हो, लेकिन उसे भारी संख्या में बमों से लैस किया जा सकता है। हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बमों से हज़ारों गुनी अधिक विनाशकारी ताक़त रखने वाला यह मिसाइल पूरे ब्रिटेन को या अमरीका के न्यूयार्क राज्य के बराबर किसी भी इलाके को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। इसलिए ऐसा लग सकता है कि सरमात मिसाइल की महाविनाशक क्षमता ज़रूरत से कुछ ज़्यादा ही है। लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

फिलहाल रूस के अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को अमरीका की मिसाइल प्रतिरोधी मिसाइल प्रणालियाँ रोक नहीं सकतीं, किन्तु यह ज़रूरी नहीं है कि भविष्य में भी यह स्थिति बरकरार रहे। आज रूस और अमरीका के बीच का सामरिक सन्तुलन पारस्परिक विनाशक मिसाइलों पर ही आधारित है। दोनों देश भली-भाँति यह जानते हैं कि यदि उनके बीच परमाणु हथियारों का आदान-प्रदान हुआ, तो दोनों ही देश पूरी तरह से नष्ट हो जाएँगे। हालाँकि अमरीका ने ’त्वरित वैश्विक प्रहार’ नामक प्रणाली के जरिए आपसी विनाश को रोकने के अपने इरादे का ऐलान किया है  क्योंकि अमरीका का रक्षा उद्योग  ’त्वरित वैश्विक प्रहार’ नामक प्रणाली का विकास कर रहा है, जिसके तहत परमाणु अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों की तरह ही पारम्परिक निर्देशित हथियारों से भी एक घण्टे के भीतर-भीतर दुनिया भर में कहीं पर भी हवाई हमला किया जा सकता है।

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’सरमात’ मिसाइल ’त्वरित वैश्विक प्रहार’ प्रणाली के हमलों तथा बाल्टिक देशों, रोमानिया और पोलैण्ड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अमरीका द्वारा तैनात की गई  मिसाइल प्रतिरक्षा व्यवस्था को रोकेगा।

’सरमात’ की दहशत और उसका ख़ौफ़

रूस के उप-रक्षा मन्त्री (आयुध) यूरी बरीसफ़  ने बताया कि ‘सरमत’ मिसाइल पाँचवीं पीढ़ी का हथियार है, जो पिछली पीढ़ी के अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों  से कहीं ज़्यादा विकसित हैं। सरमत मिसाइल 6.7 किलोमीटर प्रति सेकण्ड ( यानी लगभग 25 हजार किलोमीटर प्रति घण्टे) की गति से उड़ सकता है और 30 मिनट से भी कम समय के भीतर अमरीकी सीमा में स्थित लक्ष्यों पर प्रहार कर सकता है। रूस का पचास साल पुराना एसएस-18 मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान सिर्फ कुछ चरणों में ही दिशा परिवर्तन कर सकता था, जबकि नया अभिनव ’सरमात’ मिसाइल अपनी पूरी उड़ान के दौरान कभी भी कोई भी पैंतरा बदल सकता है। इस वजह से ’सरमात’ को अमरीका की कोई भी  मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणाली नहीं रोक सकती।

’सरमात’ मिसाइल के विकास का काम रूस की परियोजना 4202 के साथ-साथ चल रहा है। 4202 एक हाइपरसोनिक मिसाइल बम परियोजना है, जो 2020 से 2025 के बीच सक्रिय हो जाएगी। अभी तक अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों पर ऐसे बम लगे होते हैं जो लक्ष्य पर पहुँचकर लक्ष्य को नष्ट कर देते हैं। परियोजना 4202 के सक्रिय हो जाने का मतलब यह होगा कि ’सरमात’ मिसाइल पर तैनात कई बम आवाज़ की गति से भी सात से लेकर 12 गुनी तेज़ गति तक अपने लक्ष्य की ओर बढ़ेंगे।

बिल्कुल सरल भाषा में कहा जाए, तो वैश्विक सामरिक सन्तुलन को कमज़ोर करने के लिए अमरीका जिन मिसाइल प्रतिरक्षा प्रणालियों का विकास कर रहा है, ’सरमात’ मिसाइल रूस की ओर से उनका जवाब है।

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अमरीकी रक्षा प्रणाली की कमज़ोरी

रूस सोवियत सत्ता काल से ही प्रभावी मेगाटन क्षमता पर ज़ोर देता रहा है। यह बात काफ़ी सोच-समझकर पेश किए गए आकलन पर आधारित है। अमरीकी सैन्य-युद्ध महाविद्यालय के लिए जोएल वुथनो द्वारा एक रिपोर्ट तैयार की गई थी, जिसका शीर्षक था — ‘अमरीका के विदेशों में स्थित सैन्य-अड्डों पर मिसाइल ख़तरों का असर’। इस रिपोर्ट में जोएल वुथनो ने कहा था कि मिसाइल दो कारणों से आकर्षक प्रतिरोधी औजार होते हैं — पहला कारण यह है कि मिसाइल देश-विदेश में भारी संख्या में लोगों के मारे जाने का खतरा उत्पन्न करके अमरीका के राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित कर सकते हैं यानी  जानोमाल के नुक़सान से बचने या उसे कम से कम करने का घरेलू दबाव अमरीकी राष्ट्रपति को बल प्रयोग करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए बाध्य कर सकता है। रिपोर्ट में दूसरा कारण यह बताया गया था कि इन मिसाइलों की सहायता से उन देशों से भी फ़ायदा उठाया जा सकता है, जहाँ अमरीकी सैनिक तैनात हैं या जो देश अमरीका को अपने यहाँ सैन्य पहुँच प्रदान करने पर विचार कर रहे हैं। ऐसे देशों को जानोमाल के नुक़सान का और आर्थिक नुक़सान का डर दिखाकर उन्हें अमरीकी दबाव में लाया जा सकता है।

रूस के पड़ोसी देशों में और दुनिया के दूसरे हिस्सों में अमरीका की ओर से लगातार की जा रही दुस्साहसिक गतिविधियों को देखते हुए रूस के लिए बैलिस्टिक मिसाइलों के भण्डार को बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए यदि उत्तर अटलाण्टिक सन्धि संगठन यानी नाटो की सेना  उक्रईना पर चढ़ाई करने की तैयारी कर रही हो, तो उसे तितर-बितर करने के लिए परमाणु हथियारों का उपयोग किया जा सकता है। बैलिस्टिक मिसाइल सम्बन्धी रूस की इस क्षमता के कारण अमरीका को किसी भी प्रकार का सैन्य हस्तक्षेप करना बड़ा महँगा पड़ सकता है।

हालाँकि अमरीका ’त्वरित वैश्विक प्रहार’ परियोजना में अरबों डालर झोंक रहा है, परन्तु यह परियोजना भी ‘स्टार वार्स’ (तारा युद्ध) की तरह ’हवाई परियोजना’ ही साबित हो सकती है – जिसे रूस के अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों की ताबड़तोड़ झड़ी का सामना करने के लिए बनाया गया था, लेकिन जो आख़िरकार विफल हो गई। अमरीकी सैन्य विश्लेषक  क्रिस्टोफर जे. बोवी ने अपने लेख ‘पहुँच-रोधी ख़तरा और युद्ध की सम्भावना वाले क्षेत्र में स्थित वायुसैनिक अड्डे’ नामक लेख में लिखा है कि पहले से तैनात रक्षा प्रणालियों के श्रेष्ठीकरण की तुलना में आक्रामक हथियारों में वृद्धि करना कहीं ज़्यादा सरल होता है। उदाहरण के लिए, भविष्य के मिसाइलों में प्रलोभक जवाबी उपाय किए जा सकते हैं और उनपर राडार-आलोपन (स्टैल्थ) प्रणाली लगाई जा सकती है।

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उम्मीद है कि ’सरमात’ मिसाइल इन सभी प्रणालियों से लैस होगा। अपार प्रभावी वज़न उठाने की अपनी क्षमता के कारण  ’सरमात’ को दर्जनों  बमों से लैस किया जा सकेगा।  इस तरह का हर बम अमरीकी राडारों की क्षमता को नष्ट करेगा।  इसके साथ साथ अमरीकी राडारों को यह भी पहचान करनी होगी कि इस मिसाइल पर तैनात कौन से बम अमरीका व पश्चिमी देशों के महानगरों को नष्ट करने के लिए तेज़ गति से उनकी तरफ़ बढ़ रहे हैं। कुल मिलाकर इसका अन्तिम परिणाम यह होगा कि ’सरमात’ मिसाइल अमरीकी रक्षा कवच को बिल्कुल अक्षम कर देगा।

जैसा कि अमरीकी सैन्य विश्लेषक  क्रिस्टोफर जे० बोवी ने समझाया है — प्रतिरक्षा प्रणाली चाहे कितनी भी जटिल क्यों न हो, एक निश्चित संख्या में मिसाइल रखने वाला दुश्मन उस रक्षा प्रणाली को अक्षम कर सकता है – बमों की घातकता बढ़ने से यह ख़तरा सिर्फ और ज़्यादा बढ़ता है। हालाँकि भविष्य में सक्रिय अमरीकी प्रतिरक्षा प्रणालियाँ भले ही दूसरे विश्व युद्ध की भ्रामक ’अमरीकी मैजीनो रेखा’  जैसी न सिद्ध हों, लेकिन रूस की ओर से उभरते इस खतरे के कारण अमरीका की “हवाई रक्षा प्रणालियों पर काफी दबाव” तो पड़ेगा ही।

इस तरह ’सरमात’ अन्तरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल के कारण पश्चिम की सुरक्षा प्रणाली में ऐसा विशाल छेद बन जाएगा कि कोई भी मौजूदा – या निकट भविष्य में सम्भव – नया मिसाइल प्रतिरक्षा कवच पश्चिमी शहरों की सुरक्षा करने में सक्षम नहीं होगा। कैसी विडम्बना है कि ’सरमात’ मिसाइल की विध्वंसक क्षमता ही आने वाले दशकों में शान्ति को बरकरार रख सकेगी और तीसरे विश्व युद्ध का दरवाज़ा बन्द रखेगी।

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